randdddddoooooooooommmzzzzzzzzz....

9:07 PM CS Reema Jain 0 Comments

दोस्त मिलते हैं,
कुछ बिछड़ जाते हैं,
कुछ लोग नए दोस्त बनाके,
फिर उन्हें ही भूल जाते हैं.

कुछ को आसान नहीं लगता ये सफ़र,
कुछ को कभी लगता है भंवर,
कुछ को लगती है ये काँटों की डगर,
पर सबसे आसान है इसकी ही डगर.

ऐ मुस्तफा दोस्ती में हमेशा जीत नहीं होती
पर इससे गहरी कोई [प्रीत नहीं होती,
दोस्त ही हो सकते हैं सुख-दुःख के मीत,
जी लो इन पलों को इससे पहले ये जाएँ बीत.

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